Tuesday, 24 May 2016

"माँ"

-: माँ :-


माँ, तू ममता की मूरत है।
आँचल से अपने तू पंखे झुलाती,
खुद जाग के माँ तू मुझको सुलाती,
खुद भूखी रहती पर मुझको खिलाती,
मेरी आह सुनके दौड़ी चली आती,
तू लक्ष्मी, तू दुर्गा, तू देवी की सूरत है,
माँ, तू ममता की मूरत है।

ऊँगली पकड़ के मुझे चलना सिखाया,
रोता मैं जब भी, कंधे पे बिठाया,
कुछ पैसे बचाकर पढ़ाया-लिखाया,
रूठा मैं जब भी, माँ तूने मनाया,
मुझे प्यार करना माँ तेरी फितरत है,
माँ, तू ममता की मूरत है।

तेरी गोद में माँ मुझे स्वर्ग मिलता,
तुझे देख के माँ मेरा मन है खिलता,
तू रोती मैं रोता, तू हंसती मैं हंसता,
मेरे दिल में है माँ तेरा चेहरा बसता,
मेरी दुनिया तू, और तू ही जन्नत है,
माँ, तू ममता की मूरत है।

माँ जिसको तूने सीने में सहेजा,
उस बेटे को इतना दूर क्यों भेजा,
तेरे बिन कोई बात भाति नहीं है,
क्या तुझको मेरी याद आती नहीं है?
तेरे बेटे को माँ अब तेरी जरुरत है,
माँ, तू ममता की मूरत है।

-अमित

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