नारी तू महान है, कितने रूपों में जानी जाती,
कभी माँ, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी बेटी कहलाती,
जितने भी हों तेरे रूप, हर रूपों में कर्तव्य निभाती,
ऐसे किये तुमने हैं काम, जिससे सारी दुनिया थर्राती।
अत्याचार सहे हैं तुमने, वो बातें अब खलती हैं,
रामायण में सीता माँ भी अग्नि में जलती हैं,
पांडव के हीं सामने द्रौपदी का होता चीरहरण,
अहल्या को भी रहना पड़ा कई वर्षों तक पत्थर बन।
फिर भी अत्याचारों से तुम कहाँ रुकने वाली थी,
महिषासुर का मर्दन करने वाली माँ शेरावाली थी,
अंग्रेजों को धूल चटा के वीरगति को पायी थी,
मर्दानी वो जानी मानी रानी लक्ष्मीबाई थी।
मदर टेरेसा बनकर बीमारों को जीवनदीप दिया,
मीराबाई ने कृष्ण की भक्ति में है विष पिया,
कल्पना और सुनीता ने भारत का रौशन नाम किया,
इंदिरा गांधी ने भारत को नया जनमार्ग दिया।
पी टी उषा, किरण बेदी, मैरी कॉम, लता दीदी,
सबने मिलकर हिन्द के सर पे रखा ताज है,
अगणित महिआओं ने भारत का है मान बढ़ाया,
हिंदुस्तान को अपनी नारीशक्ति पे नाज है।।