जिंदगी घड़ी सी हो गयी है,
चलती है, पर ठहरी सी हो गयी है,
कहने को चक्कर हर बार लगाती है,
जाती नहीं कहीं, पर चलती जाती है।
कट रही है जिंदगी, पर खुशबु जैसे खो गयी है।
बीत रहा है वक़्त, पर हंसी मानो रो रही है।
कैलेंडर भी बदल रहा तारीखें,
धूल उसपे भी थोड़ी जमी सी हो गयी है।
जिंदगी घड़ी सी हो गयी है,
चलती है पर रुकी सी हो गयी है।
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