'वंदे मातरम्'
करते हैं हम,
साल में बस दो बार
वो भी 'कैलेंडर' देख कर।
देशभक्ति चीज़ क्या
एक छमाही मेला है,
देश की लग रही है 'वाट'
जोश फिर भी रेला है।
देश की किस को फिकर है
आज छुट्टी का है दिन,
देखो टीवी पर परेड
और गाओ 'जय हिन्द'।
आज गांधी याद
आएंगे सभी को यहाँ,
कल उसी 'गांधी' से
ख़रीदेंगे सारा जहाँ।
चलो छोड़ो ये सब
हमने कब किसी की मानी है,
कितने भी बेशरम हों हम
फिर भी दिल हिंदुस्तानी है।
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